बजट में सरकार ने घरों को लेकर कुछ फैसले लिखे हैं दिल्ली नोएडा में और घर खरीदार जिनके घर 10-10 सालों से अटके पड़े हैं इस पर चर्चा हुई, राज्य सरकार ने ऐसी कई योजनाएं बनाए लेकिन अभी तक लोगों के घर नहीं मिल पाए हैं|

अगर आप सिर्फ नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर भी देखे तो 3.5 लाख फ्लैट्स अभी भी अटके पड़े हैं
सरकार के पास यह एक गंभीर चुनौती है कि कैसे होमबायर्स की परेशानियों को कम किया जा सके|
ऐसे लोग जो घर का किराया भी दे रहे हैं और घर की ईएमआई भी दे रहे हैं और जिन्हें अभी तक घर नहीं मिले हैं ऐसे लोगों के बीच एक और नई उम्मीद जगी है, सरकार दिल्ली नोएडा के प्रोजेक्ट को लेकर काफी गंभीर है, इस बाबत वित्त मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय और एनबीसीसी के साथ एक बैठक भी हुई है, फंसे हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एक नया फाउंड बनाने की योजना है|

चुनाव नजदीक है सरकार के ऊपर भी दबाव है बजट के ठीक 1 दिन बाद हुई उस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारी शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एनबीसीसी (National Building Construction Corporation) शामिल हुआ और इस बात पर चर्चा हुई कि आखिर दिल्ली एनसीआर में अटके प्रोजेक्ट को कितने समय में पूरा किया जा सकता है, कितने पैसों की जरूरत होगी और अगर काम शुरू किया जाए तो कितने तय समय में काम पूरा किया जा सकता है

एनबीसीसी को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि प्रोजेक्ट्स का निर्माण करने में कितने पैसों की जरूरत पड़ सकती है उसका पूरा ब्यौरा दें |

इसके अलावा नेशनल हाउसिंग बैंक से भी चर्चा की जा रही है कि इस फंड का साइज क्या होगा जिसका भी डिसीजन नहीं हो पाया है, इसके अलावा सरकार यह भी चाहती है कि चुनाव से पहले कम से कम जो प्रोजेक्ट रुके हुए हैं उनके कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो जाए ताकि लोगो को इस बात का भरोसा आ जाए कि सरकार इस बारे में गंभीर है|

इस बात की भी चर्चा है कि बिल्डरों के पास जो लैंड पड़ी खाली पड़ी है उन पर कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को लाया जाए और सरकार उन कमर्शियल प्रोजेक्ट्स से कंस्ट्रक्शन फंड को पूरा करें |

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